वेश्याओं के प्रकार | Veshyavritti ke prakar in hindi

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वेश्याओं के प्रकार | Veshyavritti ke prakar in hindi

वेश्याओं के प्रकार

वेश्याएं कई प्रकार की होती है। उनके व्यवसाय चलाने के ढंग भी अलग-अलग होते हैं। इतिहास की सभी अवस्थाओं में कई प्रकार की वेश्याओं के उल्लेख मिलते हैं। साधारणतः वेश्याओं को दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है –

1. प्रत्यक्ष वेश्याएँ

अपना व्यवसाय बिना किसी संकोच के प्रत्यक्ष रूप से चलाती है। दूसरी ओर, गुप्त वेश्याएँ अपना व्यवसाय चोरी छुपे गुप्त रूप से चलाती है। प्रायः सभी वेश्याएँ इन्हीं दो मुख्य श्रेणियों में सम्मिलित की जा सकती है, लेकिन भिन्न-भिन्न आधारों का सहारा लेकर उनके अन्ध प्रकारों का भी उल्लेख किया जाता है।

आधुनिक समाज के विशेष सन्दर्भ में वेश्याओं को निम्नलिखित श्रेणियों में रखा जा सकता है  प्रत्यक्ष वेश्याएँ – इस श्रेणी की वेश्याएँ अपना व्यवसाय बिना किसी संकोच के खुलेआम चलाती है।

वे अधिकांशतः अपना व्यवसाय बदनाम मुहल्लों में वेश्यालयों में या कोठे पर चलाती है। उनके वेश्यालय साधारणतः शहरों के विशेष क्षेत्रों में रहते हैं, जिन्हें ‘लाल रोशनी क्षेत्र’ कहा जाता है।

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2. वंशानुगत वेश्याएँ

कई देशों में कुछ श्रेणियों की वेश्याएँ अपना व्यवसाय वंशानुगत चलाती आई है। वेश्यावृत्ति माँ से पुत्री को हस्तांतरित होती रहती है, और यह सिलसिला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है। भारत में तवायफ’ इसी श्रेणी की वेश्याओं में सम्मिलित है। साधारणतः,

तवायफों की आय का मुख्य स्रोत नाच-गान था, लेकिन वे यौन-संबंधों के जरिए भी काफी धन अर्जित कर लेती थी।

3. प्रथागत वेश्याएँ

विश्व के विभिन्न देशों में कुछ विशेष जनसमूहों में वेश्यावृत्ति प्रथागत चलती आई है। इन जनसमूहों में यौन सम्बन्धों में काफी छूट रहती है।

इनमें वेश्यावृत्ति को हेय दृष्टि से नहीं देखा जाता। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कई जनसमूहों की स्त्रियाँ परम्परागत प्रथाओं के कारण वेश्यावृत्ति अपनाती आ रही है।

इनमें ‘रीत’, ”कुलीना’ और ‘परवरदाह’ प्रथाओं का उल्लेख किया जा सकता है। कतिपय भारतीय जनजातियों में भी वेश्यावृत्ति प्रथागत रूप से चलती आ रही है।

4. गुप्त वेश्याएँ 

इस श्रेणी की वेश्याएँ अपना व्यवसाय चोरी छिपे गुप्त रूप से चलाती है। गुप्त रूप से व्यवसाय चलाने वाली वेश्याएँ भी कई प्रकार की होती है।

इनमें कई छोटी-छोटी नौकरियाँ करती है और अनुचित यौन सम्बन्ध के जरिए अतिरिक्त धन कमाती है। इनमें कई अपने परिवारों के साथ रहती है और धन के लोग में पर पुरूषों के साथ यौन संबंध स्थापित करती है।

कॉल गर्ल्स के अनुसार वेश्याओं के प्रकार | Veshyavritti ke prakar in hindi

इस श्रेणी की वेश्याओं को होटलों, क्लबों, शराबघरों, मनोरंजन-गृहों, अतिथिशालाओं आदि से संपर्क रहता है। ग्राहकों के अनुरोध पर उन्हें बुला लिया जाता है।

इनमें कई स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट, टेलीफोन ऑपरेटर, कम्प्यूटर प्रोग्रामर आदि के रूप में काम करती है तथा कई कॉलेजों की छात्राएँ और अस्पतालों की नर्से भी होती है।

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1.  छदवेशी वेश्याएँ

इस श्रेणी की वेश्याएँ दूसरे लुभानेवाले व्यवसायों में नियोजित तो रहती है, लेकिन उनमें कई वेश्यावृत्ति के जरिए भी बहुत कुछ अर्जित कर लेती है।

विगत वर्षों में देश के कई नगरों में लड़कियों बार-हाउसेज में परिचारिका तथा नाचने-गाने के लिए पारिश्रमिक पर काम तो करती है, लेकिन उनमें कई वेश्यावृत्ति से भी धन अर्जित करती है।

इसी तरह, ब्यूटी पार्लरों तथा मसाज-हाउसेज में काम करने वाली बड़ी संख्या में स्त्रियाँ तथा लड़कियाँ अपने सामान्य नियोजन की आय के अतिरिक्त वेश्यावृत्ति से भी पूरक आमदनी प्राप्त करती है। इस श्रेणी की वेश्याओं की संख्या दिनोदिन बढ़ती गई है।

2. रखैल

कई धनी सम्पन्न व्यक्ति अपनी कामवासना की तृप्ति के लिए रखैल भी रख लेते है। वे रखैल को जीवन निर्वाह के लिए रुपये-पैसे, धन-दौलत देते रहते हैं।

रखैलों का बहुतों के साथ यौन सम्बन्ध नहीं होता। उनका संबंध साधारणतः उनके परवरिश करने वालों से होता है, लेकिन चोरी-छिपे वे धन के लोभ में अन्य लोगों के साथ भी यौन सम्बन्ध स्थापित करती रहती है।।

3. धर्मर्पित वेश्याएँ 

कई युवतियों को धर्म की आड़ में वेश्यावृत्ति के लिए बाध्य किया जाता है। भारत में देवदासियाँ इसी प्रकार की वेश्याओं के उदाहरण है। उनका मुख्य काम अपने नृत्य और गान से मंदिरों की शोभा बढ़ाना था, लेकिन पुजारी उन्हें यौन-संबंध के लिए भी बाध्य करते रहे है।

केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तथा आंध्र प्रदेश में देवदासी-प्रथा सदियों से चली आ रही है। कई यूरोपीय देशों में गिरजाघर भी व्यभिचार के केन्द्र रहे है।

4. शोशण के शिकार – कई युवतियाँ बलात्कार, अपहरण, अनैतिक व्यापार तथा अन्य आपराधिक कृत्यों के शिकार हो जाती है। वे । स्वेच्छा से या रुपये-पैसों के लिए पर-पुरूष से समागम नहीं करती, बल्कि उन्हें अवैध यौन-संबंधों के लिए जोर-जबरदस्ती से बाध्य किया जाता है।

इनमें कुछ को तो प्रत्यक्ष रूप से व्यवसाय चलाने के लिए कोठों पर जाना पड़ता है, तथा कई को अपने घर-मुहल्ले में ही यौन-अत्याचार सहने पड़ते

5. निर्धनता के शिकार 

निर्धनता से ग्रस्त कई परिवारों की। लड़कियों और स्त्रियों को केवल अपनी अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति केलिए सतीत्व बेचना पड़ता है। बाढ़, सूखा, अकाल तथा सर्वनाश की अन्य स्थितियों में उनकी विवशता और बढ़ जाती है।

इन स्थितियों में उन्हें केवल जीवन की रक्षा तथा परिवार के भरण-पोषण के लिए पतन की ओर अग्रसर होना पड़ता है। अगर उनकी आर्थिक स्थिति ठीक रहती, तो संभवतः वे अनैतिकता से दूर रहती।

इनमें कई तो चोरी-छिपे आवश्यकतानुसार यौन संबंध करती है, तथा कई को अंततः वेश्यावृत्ति को प्रत्यक्ष रूप से व्यवसाय के रूप में अपनाना पड़ता है

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6. वासनापीड़ित वेश्याएँ 

कई युवतियों में कामवासना बड़ी प्रबल होती है। वे अनैतिकता का सहारा लेकर अपनी कामवासना की तृप्ति के लिए स्वयं पर-पुरूषों को आमंत्रित करती है। वे अपनी प्यास बुझाने के लिए पुरूषों पर खर्च करने के लिए भी तैयार रहती है। ऐसी अधिकांश वेश्याएँ पारिवारिक जीवनयापन करती है

7. विलासप्रिय वेश्याएँ 

कई स्त्रियाँ विलासलोलुप होती है। वे उचित अनुचित के विचार के बिना हर तरह से भौतिक सुख-साधनों से संपन्न जीवन व्यतीत करना चाहती है।

यहाँ यह दुहराना आवश्यक प्रतीत होता है कि वेश्याओं के उपर्युक्त वर्गीकरण में परस्पर-व्यापन भी है। कई वेश्याएँ एक से अधिक श्रेणियों में सम्मिलित की जा सकती है।

वेश्याओं के प्रकार बताते समय वेश्यावृत्ति के उद्देश्यों, व्यवसाय के स्वरूप, उसके कारणों तथा संरक्षकों या ग्राहकों की प्रकृति को ध्यान में रखा गया है, जिससे वेश्यावृत्ति के नियंत्रण और वेश्याओं के पुनर्वासन को सही परिप्रेक्ष्य में देखा जा सके।

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