सामाजिक समस्या – अर्थ एवं परिभाषा | Social Problem – Meaning and Definition in Hindi

सामाजिक समस्या – अर्थ एवं परिभाषा | Social Problem – Meaning and Definition in Hindi

क्या है सामाजिक समस्या का अर्थ

भारत में जितने भी सामाजिक समस्याएं हैं उनको समझने के लिए हमें सबसे पहले सामाजिक समस्याओं का अर्थ को स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए।

Functions of Culture In Sociology in Hindi

Definition of Culture in Sociology – Samajshashtra me Culture

सामाजिक समस्याएं वह समाज की समस्याएं होती हैं जिसमें व्यक्ति अपने व्यवहारों का समाज रूपी अनुसरण नहीं करता है एवं समाज विरोधी कार्य करता है जिससे समाज में रहने वाले अन्य व्यक्तियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

जब व्यक्ति समाज द्वारा बनाए गए नियम कानून देश के नियमों का उल्लंघन करता है और समाज के व्यवहारों के विरुद्ध कार्य करता है तो सामाजिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

वर्तमान समय में भारतीय समाज अनेक सामाजिक समस्याओं से पीड़ित है जिनके निराकरण के लिए राज्य एवं समाज द्वारा मिलकर प्रयास किये जा रहे हैं

भारत की प्रमुख सामाजिक समस्याएं

जनसंख्या विस्फोट , निर्धनता , बेरोजगारी , असमानता , अशिक्षा , गरीबी , आतंकवाद , घुसपैठ , बाल श्रमिक , श्रमिक असंतोश , छात्र असंतोष , भ्रष्टाचार , नषाखोरी , जानलेवा बीमारियां , दहेज प्रथा , बाल विवाह , भ्रूण बालिका हत्या , विवाह इत्यादि।

परिभाषाएं – सामाजिक समस्या

सामाजिक समस्याओं को समाजशास्त्रियों ने भिन्न – भिन्न दृष्टिकोणों से समझाने का प्रयास किया है । इन सभी विद्वानो ने सामाजिक समस्या के विभिन्न स्वरूपों को निम्न परिभाषाओं के आधार पर समझने का प्रयास किया हैं ।

1. अरनोल्ड एम . रोज लिखते हैं

सामाजिक समस्या एक ऐसी अवस्था है जो किसी समूह के द्वारा स्वयं के सदस्यों के लिए असंतोश के उदगम के रूप में पाई जाती है तथा इसमें उन विकल्पों को मान्यता प्रदान की जाती है जिसके द्वारा कोई समूह अथवा इसका सदस्य किसी न किसी प्रकार का परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित होता है । इसे ( सामाजिक परिस्थिति / अवस्था ) सामाजिक समस्या इसलिए स्वीकार किया जाता है क्योंकि यह सामाजिक परिवेश में ही पाई जाती है और इसके उत्तरदायी कारक सामाजिक परिवेश में ही विद्यमान रहते हैं ।

2. पॉल एच . लेंडिस के अनुसार

सामाजिक समस्याएं व्यक्तियों के कल्याण से सम्बन्धित अपूर्ण आकांक्षाए होती है । सामाजिक समस्याओं के संदर्भ में लेंडिस का अभिप्राय यह है कि जब व्यक्ति की इच्छाएं , आवश्यकताएं अथवा आकांक्षाओं की पूर्ति नहीं हो पाती तब वे सामजिक समस्याओं का स्वरूप ले लेती

3. रिचर्ड सी . फुलर एवं रिचर्ड मेयर्स का कथन

व्यवहार के जिन मानदण्डों अथवा परिस्थितियों को किसी समय विशेष में समाज के अधिकां सदस्य अवांछनीय स्वीकार करते हैं , सामाजिक समस्याएं कहलाते हैं ।इन विद्वानों की मान्यता है कि इन समस्याओं के निराकरण तथा कार्यक्षेत्र को सीमित करने के लिए सुधारात्क नीतियों , कार्यक्रमों एवं सेवाओं की अपरिहार्यता होती है ।

4. रोब अर्ल एवं जी . जे . सेल्जनिक सामाजिक समस्या के संदर्भ मे लिखते हैं

यह ( सामाजिक समस्या ) मानवीय सम्बंधों को खतरनाक तरीके से प्रभावित करती है और समाज के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न कर देती है तथा अनेक लोगों की आशाओं पर तुषारापात करती है ।

5. क्लेरेंस मार्श केस लिखते हैं

सामाजिकसमस्या का अभिप्राय किसी ऐसी सामाजिक परिस्थिति से है जो किसी भी समाज में योग्य अवलोकनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करती है तथा सामुहिक अथवा सामाजिक क्रियाविधि के द्वारा समाधान निकालने का प्रयास करती है ।

6. फ्रांसिस ई . मेरिल तथा एच . डब्ल्यू एल्डरिज सामाजिक समस्याओं की उत्पत्ति के संदर्भ मे लिखते हैं

सामाजिक समस्याएं उस अवस्था में जन्म लेती है जब गतिहीनता के कारण काफी संख्या में लोग स्वयं की अपेक्षित भूमिकाओं के निर्वहन में असमर्थ होते हैं ।

7. शेपर्ड तथा वॉस के अनुसार

सामाजिक समस्या समाज की कोई भी एक ऐसी सामाजिक दशा होती है जिसे समाज के बहुत बड़े भाग या शक्तिशाली भाग द्वारा अवांछनीय तथा ध्यान देने योग्य समझा जाता है ।

8. मेरी ई . वाल्श एव पॉल एच . फर्फे का मत है

सामाजिक समस्याएं सामाजिक आदर्शों का विचलन है जिनका निराकरण सामुहिक प्रयासों से ही सम्भव हो सकता है ।

9. पॉल बी हॉर्टन एवं जीराल्ड आर . लेस्ली लिखते हैं

सामाजिक समस्या एक ऐसी स्थिति है जो अनेक व्यक्तियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है तथा जिसका हल समूह द्वारा सामूहिक क्रिया द्वारा निकाला जाता है ।

10. रोबर्ट के मर्टन एवं निस्बेत का मत है

सामाजिक समस्या व्यवहार का एक ऐसा रूप है जिसे समाज का एक बड़ा भाग व्यापक रूप से स्वीकृत तथा अनुमोदित मानदण्डो का उल्लंघन मानता है ।

सामाजिक समस्या में सुधार के लिए करने योग्य कार्य

सामाजिक समस्या के उपयुक्त साधन निर्धारित करने के पश्चात इन्हें व्यावहारिक रूप में प्रयुक्त किया जाता है तथा वांछित सुधार लाने के प्रयास किए जाते हैं । सामाजिक समस्या की उपर्युक्त वर्णित परिभाषाओं के अनुशीलन से निम्नांकित निष्कर्श स्थापित किए जा सकते हैं

1. सामाजिक समस्या एक ऐसी अवस्था है जो सापेक्षिक रूप से अनेक लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है ।

2 सामाजिक समस्या को समाज के अधिकांश लोगों द्वारा सामूहिक कल्याण के लिए खतरा माना जाता ।

3. सामाजिक समस्या सम्पूर्ण समाज के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न करती है ।

4. यह एक ऐसी कष्टप्रद अवांछनीय दशा है जो व्यक्ति एवं समाज के विकास में बाधा उत्पन्न करती है ।

5. सामाजिक समस्या के प्रति अधिकांश लोग जागरूक होते हैं तथा इसके निराकरण हेतु सजग प्रयत्नशील रहते हैं ।

6. सामाजिक समस्या के निराकरण हेतु समाज द्वारा वांछित प्रयास किए जाते हैं तथा इसके नियन्त्रण के लिए विशिष्टीकृत संस्थागत अभिकरण पाए जाते हैं ।

7. सामाजिक समस्या के विषय में लोगों का यह दृढ़ विश्वास होता है कि समाज की यह दशा सामाजिक मूल्यों का पतन कर देती है ।

8. सामाजिक समस्या के अस्तित्व में आने के पश्चात् इसका निराकरण करने के लिए अनेक सुझावों में से किसी एक को स्वीकार कर तद्नुरूप साधनों को प्रयुक्त किया जाता है जिससे कि इसको समूल रूप से नष्ट किया जा सके 

सार रूप में हम यह कह सकते हैं कि सामाजिक समस्याएँ किसी भी समाज की वे दशाएँ एवं परिस्थितियाँ हैं जो समाज के अस्तित्व , परस्पर अन्तनिर्भरता , सुदृढता तथा स्थापित मूल्यों के लिए खतरा उत्पन्न करती हो ।

सामाजिक समस्याएं सामूहिक कल्याण में बाधा उत्पन्न कर समाज को सचेतन एवं जागरूक बनाती हैं तथा इसके निराकरण एवं समाधान हेतु वांछित प्रयास किये जाते हैं ।

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