samajikaran ki parivasha,vishestha,siddhant | समाजीकरण की परिभाषा,विशेषताएं, सिद्धान्त

samajikaran ki parivasha,vishestha,siddhant | 

समाजीकरण की परिभाषा,विशेषताएं, सिद्धान्त

samajikaran ki parivasha,vishestha,siddhant | समाजीकरण की परिभाषा,विशेषताएं, सिद्धान्त

समाजीकरण

समाजीकरण मुख्य चार समाज के मूल्य मापदंड को सीखने की एक प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म से ही एक सामाजिक प्राणी नहीं बल्कि जैविक प्राणी होता है। अगर उसको समाज में ना रखा जाए तो वह हम लोगों की तरह नहीं होगा संभवत वह मोगली नामक काल्पनिक चरित्र की तरह होगा।

1920 में बंगाल के मिदनापुर जिले में लोमड़ी की मांद में दो बालिकाओं का क्रमशः 2 वर्ष 1 एवं 8 वर्ष के लिए उनके पास रखकर देखा गया तब उन बालिकाओं में वही प्रवृत्ति थी जो एक लोमड़ी जाति में होती है

इस प्रकार समाजीकरण की प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य एक जैविक प्राणी से सामाजिक प्राणी बनता है
जॉनसन ने लिखा है कि वह शिक्षण जो सीखने वाले को सामाजिक भूमिका संपन्न करने के लिए समर्थ बनाता है सामाजिकरण कहलाता है।

जी एच फैक्टर ने सामाजिकरण की प्रतिक्रिया को तीन तरीकों से देखा है

१ नकल
२ सुझाव
3 प्रतियोगिता

 समाजीकरण के सिद्धांत

गिड्डिंग्स यह मानते हैं कि समाजीकरण मूल्य तथा स्वयं के विकास से संबंधित है परंतु स्वयं क्या है यह स्पष्ट नहीं है मनोविज्ञान में स्वयं सताते अभिव्यक्ति कि अपनी धारणा से लगाया गया है।

 कूले

फुले ने अपनी पुस्तक ह्यूमन नेचर एंड सोशल ऑर्डर नहीं है सिद्धांत प्रकाशित किया है और यह बतलाया है कि शिशु अपने जन्म के कुछ समय बाद ही यह समझने लगता है कि लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं एवं वह दूसरों की प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देने लगता है

Sigmund Freud

 सिगमंड फ्रायड को असामान्य मनोविज्ञान का पिता कहा जाता है प्राइड ने मानव के सभी व्यवहारों को तीन भागों में बांटा है
१ ऐड
२ ईगो
३ सुपर ईगो

समाजीकरण के अभिकरण एवं साधन

१ परिवार
२  शिक्षण संस्था
३   खेल संस्था
 ४ कानून
५ समाज
 ६ नियम
७ राज्य कानून
८ धर्म
९ संस्कृति

संरचना

samajikaran ki parivasha,vishestha,siddhant | समाजीकरण की परिभाषा,विशेषताएं, सिद्धान्त

सामाजिक संरचना को समझने के लिए आवश्यक है कि हम सबसे पहले उस संरचना को जाने जिसे हम अनेक बिंदुओं से निर्माण करते हैं या पहचान सकते हैं

१ प्रत्येक संरचना का निर्माण विभिन्न अंगों तत्वों या तत्वों के माध्यम से होता है

२ इन अवयवों में परस्पर स्थाई स्थापित होता है

३ इन अभियानों में स्थाई रूप से स्थापित पाया जाता है हम

४ संरचना का संबंध वस्तु की बाहरी संरचना से होता है

हरबर्ट स्पेंसर ने अपनी पुस्तक में सामाजिक संरचना का उल्लेख किया है और यह प्रस्तुत किया स्पष्ट किया है की अनेक इकाइयों या अनेक भागों को एक सार्थक रूप का आकार दिया जा सकता है

जैसे उदाहरण के तौर पर एक भवन के निर्माण के लिए हम ईट बालू सीमेंट चना आदि का यथार्थ स्थान पर रखकर एक भवन का निर्माण कर सकते हैं उसी प्रकार हम सामाजिक संरचना का भी निर्माण कर सकते हैं

ताल कट पार्सल ने संबंधित संस्थाओं और अभी करो और सामाजिक प्रतिमान ओं के साथ समूह के प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति तथा भूमिकाओं को विशिष्ट रूप से प्रकट करने के लिए सामाजिक संरचना शब्द का प्रयोग किया है

 संरचना की परिभाषा

आर के मर्टन

 सामाजिक इकाइयों की क्रमबद्ध था और उनकी पारस्परिक निर्भरता से उत्पन्न निर्भरता को सामाजिक संरचना कहते हैं

ताल कट पार्सल

जिसमें पारस्परिक संबंध संस्था सामाजिक प्रतिमान समूह के सभी सदस्यों द्वारा ग्रहण किए गए पदों और कार्यों की क्रमबद्ध ताहू वहीं सामाजिक संरचना है

मजूमदार एवं मदान

 पुनरावृति सामाजिक संबंधों के तुलनात्मक स्थाई पक्षों से सामाजिक संरचना का निर्माण होता है

 हैरी जॉनसन

प्रत्येक संरचना विभिन्न इकाइयों या अवयवों से मिलकर निर्मित होती है जिनके अंगों में परस्पर आई स्थाई संबंध पाए जाते हैं

 सामाजिक संरचना की विशेषताएं

१ सामाजिक संगठन एक अस्थाई अवधारणा है
२ सामाजिक संरचना समाज की ऊपरी स्वरूप का बोध करती है
३ सामाजिक संरचना निर्माण अनेक संगठनों से होता है
४ सामाजिक संरचना अंततः संबंधित इकाइयों का एक विशिष्ट स्वरूप है
५ रेडक्लिफ ब्राउन सामाजिक संरचना की इकाई व्यक्ति को मानते हैं

सामाजिक संरचना के प्रकार

पारस्न ने चार सामाजिक मूल्यों के आधार पर सामाजिक संरचना को चार भागों में बांटा है

१ सार्वभौमिक प्रदत्त प्रतिमान

प्रदत्त प्रति मानव में सामाजिक संरचना के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाते हैं

2 सार्वजनिक अर्जित प्रतिमान

पूंजीवादी समाज के लोगों में संपत्ति के संचय और अर्जुन को महत्व दिया जाता है।

वर्ग व्यवस्था इस प्रकार के प्रतिमान एवं सामाजिक संरचना के समाजों की विशेषता है

3  विशिष्ट प्रदत्त प्रतिमान

 ऐसे समाज संरचना में जब किसी विशेष समाज वर्ग या समुदाय को सामान्य से अलग वशिष्ठ दर्जा प्राप्त होता है वह विशिष्ट प्रदत्त प्रतिमान कहलाता है

4  विशिष्ट अर्जित प्रतिमान

विशिष्ट मूल्यों पर आधारित जो भी प्रतिमान होते हैं उन पर अधिक जोर दिया जाता है इस प्रतिमान में परिवार गोत्र वंश का महत्व अधिक पाया जाता है

प्रकार्य

 सामाजिक संरचना प्रकार्य की अवधारणाएं आपस में एक दूसरे से इतनी अधिक मिली जुली है कि एक दूसरे को पृथक करके इनका अध्ययन करना संभव नहीं है

जैसा कि समाज संरचना छोटी-छोटी कार्यों का समीकरण होता है और वह सभी इकाइयां आपस में केवल संबंधित ही नहीं होती बल्कि उनका कुछ निर्धारित कार्य भी होता है जो उचित समय पर समझा जाता है परिवार के सदस्यों से परिवार के अनुरूप कार्य करने की आशा की जाती है ।

प्रकार्य की विशेषताएं

1 प्रकार्य का संबंध समाज को बनाने वाली उन इकाइयों के कारण हैं जिनकी आशा पहले से ही की जाती है

2 प्रत्येक इकाई में प्रकार्य का अपना उद्देश्य अवश्य होता है मुख्यतः सभी प्रकार्य का उद्देश्य समाज संगठित बनाना तथा व्यक्तियों की आवश्यकता की पूर्ति करना होता है

3 किसी इकाई का प्रकार्य व्यक्ति की इच्छा नहीं बल्कि इसका निर्धारण वहां की संस्कृति विशेषताओं और सामाजिक मूल्यों पर निर्भर होता है

4 प्रकार्य एक गतिशील अवधारणा है एक समय में जो कार्य समाज के लिए उपयोगी हो सकता है वहीं प्रकार कहलाता है

5 समाज के निर्माण करने वाले कार्यों के प्रकार्य कुछ प्रत्यक्ष होते एवं कुछ अप्रत्यक्ष होते हैं प्रत्येक समाज में इन दोनों पर कार्यों का सामान महत्व होता है

6 कभी-कभी सामाजिक संरचना के सभी इकाइयों द्वारा अपने-अपने प्रकार्य पूरा करने में सामाजिक जीवन पूरा हो जाता है एवं उपयोगी हो जाता है परंतु कभी-कभी इकाइयों के प्रकार्य वास्तविक प्रगति के बाधक बन जाते हैं

 प्रकार्य के प्रकार

मटन ने प्रकार्य की दो भागों का वर्गीकरण किया है यह वर्गीकरण मटन ने फ्रांसीसी से ग्रहण किया था

1 प्रत्यक्ष प्रकार्य
 2 अप्रत्यक्ष प्रकार्य

1  मटन के अनुसार प्रत्येक प्रकार्य व परिणाम है जो सामान्य व्यवस्था में अनुकूलन का गुण उत्पन्न करते हैं तथा जो इस अवस्था में भाग लेने वाले व्यक्तियों द्वारा एक सामान्य होते हैं
 उदाहरण
प्रत्यक्ष प्रकार्य एवं जिनकी आशा पहले से की जाती है तथा जनसाधारण पहले से परिचित होते हैं जैसे पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की आशा करना और कोई भी अपराध करने के बाद दंड की आशा करना

2  मटन के अनुसार निहित प्रकार्य हुए हैं। जिसका ना तो व्यक्ति को पहले से ही ज्ञान होता है और ना ही जनसाधारण के द्वारा उन्हें मान्यता दी जाती है कहने का तात्पर्य व्यक्ति सोचता है हम चाहता कुछ और है परंतु उसका परिणाम कुछ और मिलता है

 जैसे होपी जनजाति में वर्षा लाने के लिए लोग सामूहिक रूप से नाच गान एवं तरह-तरह के उत्सव मनाते हैं

 सामाजिक नियंत्रण

सामाजिक नियंत्रण की अवधारणा सर्वप्रथम प्लेटो की पुस्तक रिपब्लिक तथा अगस्त काम्टे की पुस्तक पॉजिटिव फिलॉस्फी में देखने को मिलती है वार्ड की पुस्तक डायनेमिक सोशलॉजी में सामाजिक नियंत्रण को विस्तृत रूप से वर्णित किया गया है।

सामाजिक नियंत्रण शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम स्मॉल एंड बेस एंड द्वारा किया गया था इन्होंने अपनी पुस्तक इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ सोसाइटी में सामाजिक व्यवहार पर सकता के प्रभाव का वर्णन करते समय बताया कि सत्ता पर जनपद की प्रतिक्रिया सामाजिक नियंत्रण को काफी नाजुक एवं दूल्हा कार्य बना देती है

1894 में सामाजिक नियंत्रण के क्षेत्र में पहली पुस्तक सोशल कंट्रोल के माध्यम से रोशनी समाज को परस्पर शुद्र बनाए रखने के लिए व्यवस्थित विचार व्यक्त किए थे

 सामाजिक नियंत्रण की परिभाषा

रोज

के अनुसार सामाजिक नियंत्रण उन विधियों की व्यवस्था है जिनके द्वारा कोई समाज अपने सदस्यों को मानने व्यवहार प्रतिमान के अनुरूप बनाने का प्रयास करता है।

 bogardus

सामाजिक नियंत्रण वह प्रक्रिया है जिसके तरीके से क्रियान्वित किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह के ऊपर उद्दीपन को प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वित किया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप समाज उन कार्य करने वाले अनु क्रियाएं उत्पन्न होती है

 पार्सन

 विभक्त गामी प्रवृत्तियों की कली को फूल बनने से पहले कुचल देना सामाजिक नियंत्रण है

पीएल लैंड्रेस

सामाजिक नियंत्रण एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा सामाजिक व्यवस्था स्थापित की जाती है और बनाई रखी जाती है

 सामाजिक नियंत्रण के प्रकार एवं अंग

 परिवार

सामाजिक नियंत्रण में परिवार की भूमिका को लेकर अनेक विद्वानों ने बताया है कि चार्ल्स कूले ने परिवार तीन आधारों पर नियंत्रण के सहायक बनता है

1परार्थवादी
2 सहयोगी
3प्रोत्साहन

इमाइल दुर्खीम ने परिवारिक नियंत्रण के चार प्रकार का उल्लेख किया है
नाते रिश्ते के दबाव में व्यक्ति के व्यवहार को अनुरूपता प्रदान होती है
परिवार तथा वंश प्रतिष्ठा के प्रति सचेत रहने का परिणाम है
संतान उत्पत्ति को मूल आधार बनाकर यौन अपराध पर नियंत्रण करना
शिक्षा की प्रथम पाठशाला परिवार होती है

धर्म

इमाइल दुर्खीम के अनुसार पवित्र और अपवित्र में भेद स्पष्ट करके पवित्र कार्य को करने का और अपवित्र कार्यों से बचने को कहता है

 Max Weber

मैक्स वेबर ने सामाजिक नियंत्रण में चार भूमिका का उल्लेख किया है

1धर्म सामाजिक नियंत्रण की प्राथमिक इकाई है
2 धर्म सामाजिक एवं आर्थिक नियंत्रण रखता है
3 धर्म हमारे कल्याणकारी भावनाओं का विकास करता है
4 धर्म के अंतर्गत शुद्धता प्रदूषण पाप पुण्य स्वर्ग नर्ग की परिकल्पना व्यक्ति के अंदर
  जागती एवं व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रण करती है

  राज्य

राज्य समाज की एक ऐसी एजेंसी है जो शक्ति का उपयोग करने का धनात्मक नियंत्रण को लागू करने का अधिकार रखती है वह इस शक्ति का प्रयोग सदस्यों पर नियंत्रण रखने या किसी दूसरी समाज के खिलाफ हो सकता है ।राज्य आवश्यक रूप से व्यवस्था का निर्माण करने वाला संगठन है

 समाज

सामाजिक नियंत्रण में समाज की अहम भूमिका होती है किम बोल यंग ने सामाजिक नियंत्रण को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विभाजित किया है

 कानून

 सामाजिक नियंत्रण में वैधानिक रूप से कानून की अहम भूमिका होती है जिसमें व्यक्तियों के अंदर एक भी व्यापक होता है उत्पन्न होता है