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मद्यपान की समस्याएँ | Problems of alcoholism in Hindi

मद्यपान की समस्याएँ | Problems of alcoholism in Hindi

क्या है मद्यपान की समस्याएँ

मद्यपान एवं मादक द्रव्य व्यसन का व्यक्ति, समाज तथा परिवार पर काफी गम्भीर प्रभाव पड़ता है। इससे वैयक्तिक, पारिवारिक व सामाजिक विघटन होता है और नाना प्रकार के अपराधों में वृद्धि हो जाती है। ममोरिया तथा अन्य विद्वानों ने मद्यपान (जोकि मादक द्रव्य व्यसन के लिए भी लागू होते हैं) के अनेक प्रभावों का वर्णन किया है जिनसे आर्थिक, सामाजिक जीवन प्रभावित होता है।

1. इससे अपराध, नियम अवहेलना तथा भ्रष्टाचार बढ़ता है

2. इससे व्यक्तियों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है

3. इससे मानव मस्तिष्क प्रभावित होता है। जब तक मद्यपान अथवा मादक द्रव्य का प्रभाव रहता है मस्तिष्क ठीक तरह से काम नहीं करता

4. शिक्षा का नुकसान होता है

5. श्रमिक की क्षमता कम हो जाती है तथा इससे उत्पादन में नुकसान होता है

6. यह पारिवारिक खुशी की समाप्ति का मूल कारण है

7. वृद्धावस्था में इससे असहनीय स्थिति पैदा हो जाती है

8. आश्रितों तथा अन्त में सम्पूर्ण समाज को क्षति होती है

9. व्यसनी के शारीरिक क्षमता पर कुप्रभाव, विशेषतः यौन शक्ति का हास होता है

10. मादक द्रव्यों का छह महीनों तक निरन्तर उपयोग व्यक्ति के मिजाज को चिड़चिड़ा बना देता है तथा वह शारीरिक रूप से जटिल कार्य करने के लिए सक्षम नहीं रहता।

इस भांति, मादक द्रव्यों का सेवन अर्थव्यवस्था, कानून व्यवस्था, समाज एवं व्यक्ति के लिए इतना घातक है कि आज यह विश्व के सम्मुख सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

मद्यपान की समस्या

1.  मद्यपान तथा वैयक्तिक विघटन

इलियट तथा मैरिल का कहना है कि मद्यपान वैयक्तिक विघटन का सूचक भी है तथा कारण भी। सूचक इसलिए है कि मद्यपान से पहले उसने वैयक्तिक निराशाओं का सामना किया है। अगर मद्यपान न हो, तो हो सकता है वैयक्तिक निराशाएँ तथा असुरक्षा कोई दूसरा रूप धारण कर लें। मादक द्रव्य व्यसन वास्तविकता भुलाने का दूसरा तरीका हो सकता है।

मद्यपान से व्यक्ति अपने पैसे का दुरुपयोग करता है, पत्नी व बच्चों का ख्याल नहीं रखता, पत्नी को पीटता है तथा अन्य स्त्रियों के साथ अनैतिक सम्बन्ध रखता है। ये सब वैयक्तिक विघटन के ही चिह्न हैं। मद्यपान करने वाला व्यक्ति प्राथमिक समूहों के प्रभाव से दूर होता चला जाता है।

निवास स्थान तथा व्यवसाय में गतिशीलता, स्कूल अथवा कॉलेज शिक्षा को पूरा न करना, मनोरंजन के अन्य साधनों पर कम आश्रित होना, विवाह न करना अथवा पृथक्करण या तलाक होना इस बात की निशानी है कि मद्यपान करने वाले व्यक्ति पर प्राथमिक समूहों का प्रभाव बहुत कम होता है। शराब क्योकि व्यक्तिगत परेशानियों को दूर करने का स्थायी साधन नहीं है, इसलिए शराब पीने से कुछ निकलने के बजाय उसका अपना विघटन शुरू हो जाता है। उसका अपना चरित्र तथा नैतिक पहलू कमजोर हो जाता है तथा अन्त में वह मानसिक रोगी बन जाता है।

2. मद्यपान तथा पारिवारिक विघटन

मद्यपान पारिवारिक विघटन का भी एक प्रमुख कारण है। पारिवारिक व्यक्ति के लिए शराब पीना कभी अच्छा नहीं हो सकता क्योकि इससे पली व बच्चों के प्रति त्याग कम हो जाता है। शराबी अपना समय, पैसा तथा शक्ति शराब में ही नष्ट कर देता है तथा परिवार के लिए उसके पास कुछ बचता ही नहीं।

पहले तो अधिक मद्यपान करने वाला व्यक्ति विवाह ही नहीं करता (क्योंकि बोतल पत्नी का ही स्थानापन्न या विकल्प है) और अगर करता भी है तो मद्यपान से पति तथा पत्नी के सामाजिक कार्य बिगड़ने लगते है। दोनों के सम्बन्धों में तनाव बना रहता है।

पत्नी से छुटकारे का एक ही तरीका रहता है तलाक क्योकि बच्चों की देख-रेख भी बिलकुल नहीं हो पाती। इस प्रकार, मद्यपान केवल वैयक्तिक विघटन तक ही सीमित नहीं है अपित परिवार भी इससे बुरी तरह से प्रभावित होता

3.मदापान तथा आर्थिक विघटन

यद्यापि कुछ व्यक्ति पैसा अधिक होने के कारण मापान करते हैं, परन्तु अधिकतर शराबी अपने आर्थिक जीवन से असन्तुष्ट होने के कारण शराब का  सेवन करने लगते हैं। जो थोड़ा बहुत पैसा वे कमाते हैं वह शराब में नष्ट हो जाता है और परिवार की आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पाती। शराबी घर का सामान, गहने इत्यादि गिरवी रखकर भी शराब पीने से नहीं चूकते। इस प्रकार, मद्यपान परिवार के आर्थिक जीवन को बिलकुल खोखला कर देता है।

4. मद्यपान तथा सामाजिक विघटन

मद्यपान व्यक्ति के बाद परिवार और फिर परिवार के बाद सामाजिक विघटन करता है क्योंकि मद्यपान करने वाला व्यक्ति अपनी सामाजिक भूमिकाओं का निर्वाह ठीक प्रकार से नहीं कर सकता है। इससे अनेक अन्य बुराइयों (यथा अपराध, जुआ, वेश्यावृत्ति आदि) को भी प्रोत्साहन मिलता है जो सामाजिक विघटन की प्रक्रिया को और तेज कर देती हैं।

5. मद्यपान, अनैतिकता तथा अपराध

शराबी व्यक्तियों का नैतिक पहलू काफी कमजोर हो। जाता है और उनका मानसिक सन्तुलन भी ठीक नहीं रहता है। बस उसे दो ही बातों की आवश्यकता रहती है पैसा तथा शराब। पैसा अगर नहीं होगा तो शराबी का ध्यान गलत कार्यों की तरफ आकर्षित होता है और वह आत्महत्या, डकैती, बलात्कार इत्यादि अपराधों को करने लगता है।

एक बार अपराधी जीवन में फंस जाने के बाद वह उससे कभी निकल नहीं सकता। इस प्रकार, जहाँ पर मद्यपान अनैतिकता को प्रोत्साहन देता है वहीं पर इससे अपराधी प्रवृत्तियों को भी बढ़ावा मिलता है।

6. मद्यपान तथा शारीरिक पतन

मद्यपान से शरीर और मस्तिष्क में अनेक प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं। अत्यधिक मद्यपान से शरीर कमजोर हो जाता है। इलियट तथा मैरिल के अनुसार, “मदिरा एक नियन्त्रक के रूप में कार्य करती है जिसके फलस्वरूप यह उसकी प्रतिक्रियाओं की गति को धीमा करती है, निर्णय की योग्यता को कम करती है और सीखे हुए व्यवहार पर उसका नियन्त्रण कम होने लगता है।

” टेकचन्द अध्ययन दल ने उचित ही टिप्पणी की है कि मदिरा सेवन, वास्तव में, समस्याओं को जन्म देने वाला है जिनमें से प्रमुख इस प्रकार हैं-पारिवारिक समस्याएँ, धार्मिक समस्याएँ, उपचारात्मक समस्याएँ, औद्योगिक समस्याएँ, आर्थिक समस्याएँ, भ्रष्टाचार की समस्याएँ, कानून को लागू करने की समस्याएँ तथा यातायात की समस्याएँ।

मदिरा का अत्यधिक सेवन मद्यपान कहलाता है। ऐसा अनुमान है कि भारत में 21 प्रतिशत वयस्क पुरुष मद्यपान करते हैं। अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में यह प्रतिशत 75 तक है। यद्यपि सम्पूर्ण भारत में महिलाओं में मद्यपान की दर पुरुषों की तुलना में कम है, तथापि उत्तर-पूर्वी

राज्यों में महिलाओं में मद्यपान की दर भी अत्यधिक है। आदिवासियों तथा ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले लोगों में मद्यपान अधिक है। वैयक्तिक स्तर पर

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