आत्महत्या | आत्महत्या का अर्थ एवं विशेषतायें – Meaning and Definition of Suicide in Hindi

आत्महत्या | आत्महत्या का अर्थ एवं विशेषतायें – Meaning and Definition of Suicide in Hindi

आत्महत्या का परिचय – Introduction Of Suicide In Hindi

सन 1897 में दुर्थीम की तीसरी महत्वपूर्ण पुस्तक आत्महत्या फ्रेंच भाषा में Le Suicide के नाम से प्रकाशित हुई । अब्राहम तथा मॉर्गन के शब्दों में , ” यह पुस्तक सामूहिक चेतना से सम्बन्धित सामाजिक दबाव के एक ऐसे सिद्धान्त को प्रस्तुत करती है जिसमें अवधारणात्मक सिद्धान्त तथा आनुभाविक शोध के बीच एक विलक्षण समन्वय किया गया है ।

साधारणतया आत्महत्या को एक साधारण सी घटना समझा जाता है जो कुछ वैयक्तिक कठिनाइयों का परिणाम होती है । दुखीम ने इस सामान्य धारणा का खण्डन करते हुए आत्महत्या को एक वैयक्तिक घटना न मानकर इसे एक सामाजिक तथ्य के रूप में स्पष्ट किया ।

उन्होंने संसार के विभिन्न देशों से आत्महत्या सम्बन्धी व्यापक ऑकडे एकत्रित करके यह बताया कि आत्महत्या की घटनाएँ भी एक तरह का सामाजिक प्रवाह है जो अधिक संवेदनशील लोगों को अपने साथ बहा ले जाता है ।

  UPSC - Geography Optional Syllabus PDF in Hindi - जियोग्राफी ऑप्शनल सिलेबस (हिंदी मैं)
  UPSC Complete GS 1 Syllabus In Hindi - Complete Syllabus GS 1 In Hindi

दूसरे शब्दों में , अन्य सामाजिक तथ्यों की तरह आत्महत्या भी सामूहिक चेतना तथा सामूहिक दबाव की ही उपज होती है । अपने इन विचारों के द्वारा एक और दुर्थीम मनोविज्ञान , जीव विज्ञान वंशानुक्रम तथा भौगोलिक कारकों पर आधारित आत्महत्या सम्बन्धी विचारों का खण्डन करना चाहते थे तो दूसरी ओर , उनका उद्देश्य सांख्यिकीय प्रमाणों के आधार पर आत्महत्या के बारे में एक समाजशास्त्रीय विवेचना प्रस्तुत करना था ।

अपनी पैनी दृष्टि और विश्लेषण की क्षमता की सहायता से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि समाज ही व्यक्ति के जीवन को सामाजिक और नैतिक आधार पर नियन्त्रित करने वाला सबसे प्रमुख आधार है ।

यह भी जाने 

Vishwa ki Prachin Sabhyatayen Notes

Scope of Sociology in Hindi

सामाजिक समस्‍या के समाधान

आत्म हत्या का अर्थ एवं विशेषतायें – Meaning and characteristics of suicide in hindi

आत्महत्या एक ऐसा सामान्य शब्द है जिसका अर्थ सभी लोग जानने का दावा कर सकते हैं । इस कारण साधारणतया इसे परिभाषित करने की आवश्यकता महसूस नहीं की जाती ।

इसके विपरीत दुर्थीम यह मानते हैं कि आत्महत्या ऐसी सामान्य अवधारणा नहीं है जैसी कि साधारणतया समझ ली जाती है । दूसरे , सामाजिक तथ्यों की तरह आत्महत्या भी एक ऐसी सामाजिक घटना है जिसमे बाहाता और बाध्यता का गुण होता है ।

इस दशा में यह आवश्यक है कि आत्महत्या से सम्बन्धित विभिन्न पक्षों को समझकर इसे भी समुचित रूप से परिभाषित किया जाये । वास्तविकता यह है कि सामान्य मृत्यु तथा आत्महत्या दो भिन्न दशाएँ है । इस दृष्टिकोण से यदि आत्महत्या से सम्बन्धित उन तत्वों को ज्ञात कर लिया जाये जिनका सामान्य मृत्यु में अभाव होता है तो आत्महत्या के अर्थ को भली – भाँति समझा जा सकता है ।

इसे स्पष्ट करते हुए दुखीम ने लिखा है , ” आत्महत्या शब्द का प्रयोग किसी भी ऐसी मृत्यु के लिए किया जाता है जो मृत व्यक्ति द्वारा किये जाने वाले किसी सकारात्मक या नकारात्मक कार्य का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष परिणाम होती है ।

इस कथन में स्पष्ट होता है कि आत्महत्या प्रत्यक्ष अथवा आप्रगक्ष रूप से मृतक द्वारा की गयी किया का ही परिणाम होती हा दुखीम यह मानते है कि जब कोई व्यक्ति स्वयं अपने जीवन को समाप्त करता है ।

तो इस क्रिया के कारण उस व्यक्ति के बाहर स्थित होते हैं । इस अर्थ में आत्महत्या कुछ बाहरी दशाओं के दबाव से उत्पन्न होने वाला एक ऐसा परिणाम है जिसे समझने के बाद भी व्यक्ति उससे बच नहीं पाता । इसके बाद भी यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आत्महत्या अपने जीवन को समाप्त करने के लिए मृतक द्वारा किये जाने वाले प्रयल का प्रत्यक्ष परिणाम है , अप्रत्यक्ष नहीं ।

उदाहरण के लिए , यदि कोई व्यक्ति किसी ऊँचे स्थान से जमीन पर यह समझकर नीचे कूद पड़े कि जमीन उससे केवल 10 फुट नीचे है लेकिन वास्तव में अधिक ऊँचाई पर होने के कारण कूदने से उसकी मृत्यु हो जाये तो यह उसकी क्रिया का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं होगा । इस दशा में इसे एक दुर्घटना कहा जायेगा , आत्महत्या नहीं ।

वास्तव में , कुछ बाहरी दशाओं के प्रभाव से आत्महत्या मृतक द्वारा किया जाने वाला एक ऐसा विचारपूर्वक कार्य है जिसके परिणाम के प्रति व्यक्ति पहले से ही चेतन होता है । इस आधार पर दुर्थीम ने आत्महत्या को परिभाषित करते हुए लिखा है , ‘ आत्महत्या , शब्द का प्रयोग मृत्यु की उन सभी घटनाओं के लिए किया जाता है ।

जो स्वयं मृतक के किसी सकारात्मक या नकारात्मक कार्य का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम होती है तथा जिसके भावी परिणाम को वह स्वयं भी जानता है । इस कथन के द्वारा दुर्थीम ने यह स्पष्ट किया कि आत्महत्या सदैव किसी सकारात्मक क्रिया का ही परिणाम नहीं होती बल्कि किसी नकारात्मक क्रिया के द्वारा भी आत्महत्या की जा सकती है ।

उदाहरण के लिए जहर खाकर या स्वयं को गोली मारकर की जाने वाली आत्महत्या एक सकारात्मक क्रिया का परिणाम है , जबकि घातक बीमारी के बाद भी दवा लेने से इन्कार करना अथवा भोजन न करके जीवन का त्याग कर देना आत्महत्या के लिए की जाने वली नकारात्मक क्रिया है ।

आत्महत्या से सम्बन्धित किया जाने वाला कार्य चाहे मामाकारिभाषिक रूप से जब तक उसके शातक परिणाम तब तक उसे आत्महत्या नहीं कहा जा सकता । दीम के शब्दों में , ” आत्महत्या केवल ( उसी अवस्था में विद्यमान होगी जब व्यक्ति उस घातक कार्य को करने के उसके परिणाम को निश्चित रूप से जानता हो , यद्यपि स निश्चितता का मात्रा काछ कम या अधिक हो सकती है ।

यदि किसी धातक क्रिया के परिणाम के बारे में वाशि निश्चित रूप से नहीं जानता तो उससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर भी इसे आत्महत्या नहीं कहा जायेगा । उदाहरण के लिए सर्कस में मौत की छलांग लगाने वाला या विषैले सांपों के करतब दिखाने वाला व्यक्ति अपनी इनक्रियाओ का परिणाम केवल लोगों का मनोरंजन करना समझता है ।

इसके यदि मौत की छलांग लगाने का साँके काट लेने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाये तो इसे आत्महत्या नहीं कहा जा सकता

आत्महत्या की अवधारणा से इसके कुछ प्रमुख तत्व अथवा विशेषताएं स्पष्ट होती है जिन्हें सरल शब्दों में निम्नांकित रूप से समझा जा सकता

आत्महत्या की प्रमुख विशेषताएं – Meaning and characteristics of suicide in hindi

1. वैयक्तिक क्रिया का परिणाम 

आत्महत्या का सबसे प्रमुख तत्व अथवा विशेषता यह है कि यह स्वयं आत्मघात करने वाले व्यक्ति की क्रिया का परिणाम होती है । दुर्थीम के अनुसार यह क्रिया सकारात्मक भी हो सकती है और नकारात्मक भी । उदाहरण के लिए अपने आपको गोली मारकर या किसी ऊंचे स्थान से कूदकर जान दे देना सकारात्मक क्रिया है , जबकि खाना खाने से इन्कार करके जीवन को समाप्त कर देना नकारात्मक क्रिया है ।

2 . परिणाम के प्रति चेतना

अनुसार आत्महत्या मृतक द्वारा की जाने वाली क्रिया का प्रत्यक्ष परिणाम होता है । इस परिणाम के प्रति आत्मधात करने वाला व्यक्ति पूरी तरह चेतन होता है अन्यात वह जानता है कि एक विशेष कार्य का परिणाम मृत्यु के रूप में दुर्थीम के होगा । यदि किसी खतरनाक काय के फलस्वरूप आकस्मिक रूप से व्यक्ति की मृत्यु हो जाये तो ऐसे कार्य में परिणाम के प्रति चेतना का अभाव होने के कारण उसे आत्महत्या नहीं कहा जा सकता ।

3. स्वेच्छा का समावेश

आत्महत्या एक ऐसी क्रिया है जिसे व्यक्ति अपनी इच्छा से करता है । यदि किसी व्यक्ति को अपना जीवन स्वयं  समाप्त करने के लिए कुछ लोगों के द्वारा बाध्य किया जाये तथा व्यक्ति की मृत्यु उसी बाध्यता का परिणाम हो तो ऐसी मृत्यु को भी आत्महत्या की श्रेणी में नहीं रखा जायेगा ।

इसका अर्थ है कि आत्महत्या के लिए व्यक्ति में एक स्पष्ट इरादे का होना आवश्यक तत्व है । इसी के द्वारा दुर्शीम ने यह स्पष्ट किया कि आत्महत्या तथा मृत्यु में एक स्पष्ट अन्तर है क्योकि मृत्यु एक ऐसी दशा है जिसमें स्वेच्छा का अभाव होता है

4. उद्देश्य का समावेश

प्रत्येक आत्महत्या के पीछे मृतक का कोई – न – कोई उद्देश्य अवश्य होता है , चाहे यह उद्देश्य प्रत्यक्ष हो अथवा अप्रत्यक्ष । दुर्थीम का यह मानना है कि आत्महत्या का उद्देश्य सदैव स्पष्ट नहीं होता लेकिन आत्महत्या का एक ऐसा सामाजिक आधार अवश्य होता है जो किसी व्यक्ति को आत्महत्या करने की प्रेरणा देता है । यह उद्देश्य व्यक्तिगत भी हो सकता है और सामूहिक भी ।

एक व्यक्ति यदि आत्महत्या के द्वारा परिवार को बदनामी या आर्थिक दिवालियेपन से बचाना चाहता है तो यह व्यक्तिगत उद्देश्य है , जबकि देश की रक्षा के लिए एक सैनिक द्वारा जान – बूझकर अपने प्राणों का बलिदान कर देना सामूहिक उद्देश्य का उदाहरण है । यदि कोई व्यक्ति बिना किसी उद्देश्य के एकाएक गहरी नदी में छलांग लगाकर या रेलगाड़ी के आगे कूदकर अपनी जान दे दे तो इसे केवल एक मनोविकार ही कहा जायेगा । 

5. आत्महत्या का कारण व्यक्ति से बाह्य

दुखीम ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आत्महत्या का कारण व्यक्ति के अन्दर विद्यमान नहीं होता बल्कि कुछ बाहरी दशाएँ व्यक्ति को आत्महत्या करने की प्रेरणा देती है । आत्महत्या का कारण यदि व्यक्ति के अन्दर स्थिर होता तो विभिन्न अवधियों में आत्महत्या की दर में बहुत असमानता देखने को मिलती । इसके विपरीत , विभिन्न समाजों में थोड़े – बहुत अन्तर के साथ आत्महत्या की घटनाएँ एक निश्चित दर से घटित होती रहती है ।

इससे यह प्रमाणित होता है कि सामाजिक संरचना सम्बन्धी कुछ विशेषताएँ ही आत्महत्या के लिए अनुकूल दशाएँ उत्पन्न करती है । जब तक इन दशाओं में अधिक परिवर्तन नहीं हो जाता , तब तक आत्महत्या की दर में भी कोई परिवर्तन नहीं होगा ।

6 . एक सामाजिक तथ्य

दुर्थीम के अनुसार आत्महत्या की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि आत्महत्या एक वैयक्तिक घटना नहीं बल्कि एक सामाजिक तथ्य है । दूसरे शब्दों में , आत्महत्या का कारण गिक्तिक न होकर सामाजिक होता है । किसी वैयक्तिक घटना को पति को जीव – रचना , मानसिक दशाओ अथवा अनुकरण आदि के आधार पर समझा जा सकता है ।

इसके विपरीत , सामाजिक घटना का कारण समाज की संरचना तथा समाज के नैतिक संगठन में निहित होता है । दुर्शीम ने यूरोप के विभिन्न देशों से आत्महत्या सम्बन्धी आँकड़े एकत्रित करके यह स्पष्ट किया कि विभिन्न समाजों की सामाजिक , धार्मिक तथा आर्थिक संरचना के अनुसार ही वहाँ आत्महत्या की दर में भिन्नता देखने को मिलती है तथा एक विशेष समाज में प्रत्येक वर्ष आत्महत्या की दर में अधिक भिन्नता नहीं पायी जाती ।

इसका तात्पर्य है कि सामाजिक दशाएँ ही आत्महत्या की दर को प्रभावित करती है । आत्महत्या इसलिए भी एक सामाजिक तथ्य है । कि इसमें वाह्यता तथा बाध्यता की विशेषताएं देखने को मिलती है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *