Karl Marx (Historical materialism) ऐतिहासिक भौतिकवाद in Hindi

Karl Marx (Historical materialism) ऐतिहासिक भौतिकवाद in Hindi

Karl Marx (Historical materialism) ऐतिहासिक भौतिकवाद in Hindi
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ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) in Hindi

(Karl Marx) कार्ल मार्क्स ने यह सिद्धान्त पूँजीवाद समाज के उद्विकास के संबंध में प्रतिपादित किया। यह उद्विकास सामाजिक परिवर्तन के सिद्धान्त के अंतर्गत आता है।
जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है। ऐतिहासिक भौतिकवाद अर्थात् बीते हुए समाजो की भौतिकवाद के आधार पर व्याख्या करना ही ऐतिहासिक भौतिकवाद’ हैं। यह पहले भैतिकवाद की व्याख्या करते हैं। इनके अनुसार प्रत्येक समाज की दो संरचनाएँ . होती हैं

  • अधोसंरचना (Infrastructure or Sub-structure) 
  • अधिसंरचना ( Superstructure)

आथिक व्यवस्था के  अंतर्गत उत्पादन का (Mode of production) हैं।उत्पादन के संबंध (Relation of production) पाया जाता है।  मार्क्स के अनुसार जब उत्पादन के साधन में परिवर्तन आता है तो लोगों के आपसी संबंध अर्थात् उत्पादन के संबंध में परिवर्तन आ जाता है, तो सम्पूर्ण उत्पादन प्रणाली में परिवर्तन आ जाता है

और जब सम्पूर्ण उत्पादन प्रणाली में परिवर्तन आ जाता है तो सम्पूर्ण आर्थिक व्यवस्था में परिवर्तन आता है और जब आर्थिक व्यवस्था में परिवर्तन आता है तो सम्पूर्ण समाज मे परिवर्तन आ जाता है क्योंकि आर्थिक व्यवस्था ही समाज में परिवर्तन का एक मात्र कारण है। यही मार्क्स का ‘आर्थिक निर्धारणवाद‘ या ‘भौतिकवाद’ हैं।

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मार्क्स के अनुसार इतिहास में चार प्रकार के समाज पाये जाते हैं।

1. आदिम समाज 

आदिम समाज में मानव झुण्ड बनाकर रहते थे। इसमें कोई वर्ग नहीं पाया जाता था। सभी के मध्य भाई चारे का सम्बन्ध पाया जाता था। सभी के कार्य योग्यता और क्षमता के अनुसार बँटे थे और उस कार्य के फलस्वरूप जो कुछ प्राप्त होता था वह सभी में आवश्यकतानुसार वितरित कर दिया जाता था इसलिये इसे आदिम साम्यवादी समाज’ कहा जाता है।

जब तक उत्पादन के कोई साधन नहीं थे तब तक यह आदिम समाज, आदिम साम्यवादी समाज के रूप में विद्यमान थे। किन्त जैसे ही उत्पादन के साधन के रूप में पत्थर के औजार का निर्माण हुआ वैसे ही लोगों के सम्बंध में परिवर्तन हो गया अर्थात् उत्पादन के संबंधों में परिवर्तन हो गया।

जहाँ कल तक भाई-चारे के संबंध पाए जाते थे वहीं पत्थर के औजाररूपी उत्पादन के साधन के माध्यम से मालिक और दास के संबंध विद्यमान हो गये और जब उत्पादन के साधन: और संबंध दोनों परिवर्तित हो गए तो संपूर्ण उत्पादन प्रणाली परिवर्तित हो गई जब संपूर्ण उत्पादन प्रणाली परिवर्तित हो गई तो संपूर्ण आर्थिक व्यवस्था परिवर्तित हो गई और तब संपर्ण समाज परिवर्तित हो गया। और आदिम समाज ‘प्राचीन समाज’ के रूप में परिवर्तित हो गया।

2. प्राचीन समाज  

प्राचीन समाज मे पहले पत्थर के औजार उत्पादन का साधन थे। मालिक और दास के संबंध पाए जाते थे परंतु जैसे ही भूमि उत्पादन के साधन के रूप में प्रयोग होने लगी वैसे ही लोगों के संबंध बदल गए। यहाँ जमीदार और किसान दो वर्ग बन गए।

जब उत्पादन के साधन और संबंध दोनो बदल गए तो संपूर्ण उत्पादन प्रणाली परिवर्तित हो गई और उत्पादन प्रणाली परिवर्तित हुई तो सम्पूर्ण आर्थिक व्यवस्था परिवर्तित हो गई और फिर संपूर्ण समाज परिवर्तित हो गया तो प्राचीन समाज ‘सामंतवादी समाज’ के रूप में परिवर्तित हो गया।.

3. सामंतवादी समाज 

सामंतवादी समाज में उत्पादन के साधन जब भूमि से परिवर्तित होकर बड़ी-बड़ी मशीने और उद्योग बन गए तो लोगो के संबंध बदल गए और पूँजीपति और सर्वहारा दो वर्ग बन गए।

जब उत्पादन के साधन और संबंध दोनो बदल गए तो संपूर्ण उत्पादन प्रणाली बदल गई और जब उत्पादन प्रणाली परिवर्तित हो गई तो संपूर्ण आर्थिक व्यवस्था परिवर्तित हो गई तब संपूर्ण समाज परिवर्तित हो गया और सामंतवादी समाज पूँजीवाद समाज’ में परिवर्तित हो गया। इस प्रकार पूंजीवाद समाज का उद्विकास हुआ

निष्कर्षतः Conclusion

मार्क्स ने अपने इस सिद्वान्त द्वारा बीतें हुए. समाजों की व्याख्या भौतिकवाद के . आधार पर की समाजों में पाए जाने वाले वर्गो की व्याख्या की तथा पूँजीवाद समाज के लविकास का वर्णन किया।