History Of Indian National Movement In Hindi – क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास

History Of Indian National Movement In Hindi – क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास

क्रांतिकारी आंदोलन दो क्षेत्रों में हुई

  1. भारत
  2.  विदेश 

क्रांतिकारी आंदोलन का प्रथम चरण

बंगाल विभाजन के बाद क्रांतिकारी आंदोलन उग्र रूप ले लिया और 1910 आते – आते समाप्त हो गयी । गरम दल के सभी नेता ग्रामिण क्षेत्र के थे । क्रांतिकारी आंदोलन की शुरुआत महाराष्ट्र से बाल गंगाधर तिलक ने किया इन्होंने क्रांतिकारी युवाओं को एकजुट होने , राष्ट्रवाद की भावना भरने के लिए तथा शस्त्र की प्रशिक्षण देने के लिए 1893 में गणपति महोत्सव तथा 1895 में शिवाजी महोत्सव प्रारंभ किया । इनका कहना था ” स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार हैं और हम इसे लेकर ही रहेंगे । “

व्यायाम मण्डल

इसकी स्थापना 1897 में चापेकर बंधुओं ने किया । इन्होंने पुना के प्लेग अधिकारी आयर्स्ट की हत्या कर दी क्योंकि , वह भारतीय जनता के सहयोग करने बजाय टैक्स वसुल रहा था । 

मित्र मेला

इसकी स्थापना 1901 में विनायक दामोदर सावरकर ने किया । यह मित्र मेला आगे जाकर अभिनव भारत बन गया । इसी अभिनव भारत के एक सदस्य ने नासिक के मजिस्ट्रेट जैक्सन की हत्या कर दी । 1907 में सावरकर लंदन गए । जहाँ 1857 के क्रांति की 50 वीं सालगीरह मनाई जा रही थी । इन्होंने अपनी पुस्तक India War for Freedom में 1857 की क्रांति को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा है ।

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अनुशिलन समिति

इसकी स्थापना प्रेम नाथ ढिंगरा ने किया । यह बिहार बंगाल में सक्रिय था । इसी के सदस्य प्रफुल्ल चाकी तथा खुदीराम बोस ने 1908 में मुजफ्फरपुर के जज किंग्स फोर्ड की गाड़ी पर बम फेंका किन्तु किंग्स फोर्ड की पत्नी केन्डी की मृत्यु हो गई । प्रफुल्ल चाकी पुलीस की डर से आत्म हत्या कर लिए । अंग्रेजों ने खुदीराम बोस को फाँसी दे दिया ।

यह सबसे कम उम्र में फाँसी चढ़े थे । बंगाल के क्रांतिकारी अरविन्द घोष को अंग्रेजों ने खुदीराम बोस समझकर यातनाए दिया , जिस कारण अरविन्द घोष सन्यासी बन गए और पाण्डेचेरी में ओरिविल आश्रम खोला । इन्होंने ऐसेस ऑफ गीता नाम की पुस्तक लिखा ।

युगांतर समाज

बंगाल के क्षेत्र से क्रांतिकारी आंदोलन वरिन्द्र नाथ घोष तथा भुपेन्द्र नाथ घोष ने किया । इन्होंने युगांतर नामक पत्रिका में कहा कि यदि 30 करोड़ भारतीयों के 60 करोड़ हाथ एक साथ खड़े हो जाए तो कोई अंग्रेज ताकत उसे नहीं रोक सकता । – > 35 1910 आते – आते क्रांति आंदोलन का पहला चरण समाप्त हो गया ।

क्रांतिकारी आंदोलन का दूसरा चरण →

द्वितीय चरण की शुरूआत महात्मा गाँधी के अचानक असहयोग आंदोलन समाप्त करने के कारण हुआ । हिन्दुस्तान Republic Assosiation – – इसकी स्थापना सचिन सानयाल ने Oct. 1924 में की इसी संगठन के सदस्य ने काकोरी षडयंत्र किया ।

काकोडी षडयंत्र

काकोडी षडयंत्र ( 9 August [ 1925 ) : सहारणपुर से लखनऊ आ रही ट्रेन को काकोरी नामक स्थान पर रोक कर उसमें ब्रिटिश खजाना को लूट लिया गया । इस आरोप में अस्फाकउल्ला खान , रौशन लाल , राजेन्द्र लाहिरी , राम प्रसाद विस्मिल को फाँसी दे दिया गया । फाँसी पर चढ़ने वाले पहले मुस्लिम क्रांतिकारी अस्फाकउल्ला खान थे राम प्रसाद बिस्मिल का नारा था ” सरफरोस की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

” काकोडी कांड के मुख्य अभियुक्त चंद्रशेखर आजाद वहां से फरार हो गए बाद में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से मुडभेड़ हो गई । चंद्रशेखर आजाद ने अपनी आखिरी गोली से खुद को गोली मार ली ।

इस प्रकार 27 फरवरी , 1931 को इनकी मृत्यु हो गई । इनका कहना था “ English has no bullet to shoot me . ” भगत सिंह ने 1926 में नौजवान सभा की गठन किया । इन्होंने 1928 में HSRA ( Hindustan Soclist Republic Assosiation ) का गठन किया । इसी के सदस्यों ने लाहौर के केन्द्रिय एसेम्बली में बम फेंक दिया ।

भगत सिंह ने कहा अंग्रेज सोये हुए हैं इन्हें जगाने का यही रास्ता है । इस बम कांड के कारण भगत सिंह , राजगुरु , बटुकेश्वर दास पर मुकदमा चलाया गया और 14 फरवरी , 1931 को इन्हें मौत की सजा सुना दी गई । और 23 मार्च , 1931 को इन्हें फाँसी दे दिया गया । भगत सिंह का नारा था ” इनकलाब जिंदाबाद ” अर्थात यह क्रांति जीवित रहेगी ।

Note : जतीनदास जेल में भूख हड़ताल पर बैठ गए और जेल में उनकी मृत्यु हो गई ।

चटगांव षडयंत्र

बंगाल क्षेत्र में सूर्यसेन ने क्रांतिकारी आंदोलन को 1930 में बढ़ावा दिया । इन्होंने अप्रैल , 1930 को चटगांव में अंग्रेजों के शस्त्रागार को लूट लिया । जिस कारण अंग्रेजों ने इन्हें 1934 में फाँसी दे दिया । इस प्रकार भारत का क्रांतिकारी आंदोलन समाप्त हो गया ।

विदेशों में हुए क्रांतिकारी आंदोलन

India House

इसकी स्थापना 1905 में लंदन में श्यामजी कृष्ण वर्मन ने किया ।

Stugard सम्मेलन

( 1907 ) : जर्मनी के इस सम्मेलन में विभिन्न राष्ट्रों को बुलाया गया जिसमें भारतीय स्वतंत्रता की जननी मैडम भिखाजी कामा ने तिरंगा झंडा लहराया

गदरपार्टी

इसकी स्थापना लाला हरदयाल ने 1913 में USA के सेंट फ्रांसिसको में किया । यह एक क्रांतिकारी संगठन था ।

कामागाटा मारू

( 1914 ) गुरुदत्त सिंह ने कामागाटा मारू नामक जपानी जहाज को भाड़े पर लिया और कुछ भारतीयों को कलकत्ता से लेकर कनाडा की ओर चल दिया किन्तु कनाडा सरकार अँग्रेजों के दबाव में आकर यह घोषणा किया की बैकुअर बंदरगाह पर उसी जहाज को रूकने दिया जाएगा जो रास्ते में बिना कहीं रूके आया है किन्तु कामागाटामारू जहाज सिंगापुर में रूका था ।

अत : कनाडा सरकार ने उस जहाज को बैकुअर बंदरगाह पर रूकने नहीं दिया । अतः जहाज वापस कलकत्ता बंदरगाह लौट आया । जब ये क्रांतिकारी वापस कलकत्ता के बजबज बंदरगाह पर पहुंचे तो अंग्रेजों और इनके बीच गोलीबारी शुरू हो गई इस घटना को कामागाटा मारू की घटना कहते हैं ।

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