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Congress Party History in Hindi | कांग्रेस पार्टी का इतिहास

Congress Party History in Hindi | कांग्रेस पार्टी का इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ( 1885 )

कांग्रेस पार्टी की स्थापना

कांग्रेस की स्थापना अंग्रेजों ने अपनी खुद की सुरक्षा वाल के रूप में किया था । किन्तु कांग्रेस भारतीय क्रांतिकारियों का एक मंच बन गया । कांग्रेस के संस्थापक स्कॉटलैण्ड के असैन्य अधिकारी ए ० ओ ० ह्युम थे । इन्हें शिमला का संत ( Harmit of Shimla ) कहा जाता था ।

कांग्रेस के अधिवेशन

कांग्रेस के वार्षिक बैठक अधिवेशन कहलाती थी । कांग्रेस का अधिवेशन दिसम्बर महिने में होता था किन्तु 1930 के बाद यह जनवरी से होने लगा । कांग्रेस अधिवेशन के पहले अध्यक्ष ओमेश चंद्र बनर्जी थे । कांग्रेस का पहला अधिवेशन पुना में प्रस्तावित था किन्तु वहां प्लेग फैल जाने के कारण इसे बम्बई के गोकुल दास तेजपाल संस्कृत विद्यालय में आयोजित किया गया । जिसने कुल 72 प्रतिनिधियों में भाग लिया ।

कांग्रेस का काल

कांग्रेस की स्थापना जब 1885 में हुई तो उस समय भारत का वायसराय लार्ड डफरिन था । कांग्रेस के पहले 20 साल का काल उदारवादी का काल कहलाता है क्योंकि इस समय कांग्रेस अंग्रेजों के हाँ में हाँ मिलाती थी । उदारवादी के काल को बालगंगाधर तिलक ने राजनीतिक शिक्षा का काल कहा है । उदारवादी काल के प्रमुख नेता W.C. बनर्जी दादा भाई नौरोजी तथा रविन्द्रनाथ टैगोर थे ।

बंगाल का विभाजन

अंग्रेजों ने जब 1905 में बंगाल का विभाजन किया तो कांग्रेस के अंदर से भी बगावत प्रारंभ होने लगी जो आगे चलकर गरम दल तथा नरम दल में टुट गया । बंगाल विभाजन ( 1905 ) बंगाल में राष्ट्रवाद चरम सिमा पर पहुँच गया था । अतः राष्ट्रीय चेतना को समाप्त करने के लिए अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया ।

किन्तु अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन का कारण प्रसासनिक सुधार को बताया । बंगाल विभाजन की घोषणा लार्ड कर्जन ने 19 जुलाई , 1905 ई . को किया और 16 अक्टुबर , 1905 को विभाजन पुर्ण कर दिया ।

पुर्वी बंगाल में मुसलमानों को अधिक रखा और पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं को अधिक रखा । अंग्रेज मुसलमानों के संरक्षक का काम करने लगे और उन्हें पूर्वी बंगाल में हिन्दुओं से लड़वाने लगे ।

जबकि पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक मुसलमानों से अंग्रेज यह कहते थे कि हम तुम्हारे संरक्षक बनकर रहेंगे । अंग्रेज बंगाल से फुट डालो और शासन करो की नीति प्रारंभ कर दिए ।

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स्वदेशी तथा बहिष्कार आंदोलन

अंग्रेजों की बंगाल विभाजन की नीति सफल नहीं हो पाई क्योंकि 1905 में बंगाल के टाउन हाउस से स्वदेशी तथा बहिष्कार आंदोलन प्रारंभ हो गया था । भारतीयों ने अंग्रेजों के वस्त्र , विद्यालय , वस्तुएँ इत्यादि का बहिष्कार किया और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाया ।

भारतीय लोगों ने अंग्रेजों के कपड़े धुलने , उनके यहाँ नौकरी करने तथा उनके विद्यालय में पढ़ने से मना कर दिया । जमशेदजी टाटा ने जमशेदपुर में TATA Iron and Steel Company (TISCO) की स्थापना की ।

स्वदेशी आंदोलन के दौरान भारतीयों ने विदेशी कपड़ों को जला दिया । रविन्द्र नाथ टैगोर ने वस्त्र जलाने को एक निष्ठुर अपराध कहा । स्वदेशी आंदोलन के प्रमुख नेता वोमेश चंद्र बनर्जी रवीन्द्र नाथ टैगोर इत्यादि थे । इन्होंने बंगाल विभाजन को रद्द करने के लिए बंग भंग आंदोलन चलाया ।

दिल्ली दरबार

1911 में लॉर्ड हार्डिंग के समय ब्रिटेन के राजा जार्ज पंचम भारत आए । उनके आगमन पर दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसे दिल्ली दरबार कहते हैं । इसी दौरान 1911 में तीन घोषणाएँ की गई ।

( i ) बंगाल विभाजन के रद्द किया जाएगा ।

( ii ) बंगाल से बिहार को अलग कर दिया जाएगा ।

( iii ) भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली बनाई जाएगी ।

इन तीनों घोषणाओं को 1 जनवरी , 1912 को लागू किया गया ।

Note : 1912 में बंगाल से बिहार अलग हुआ । 1936 में बिहार से उड़ीसा अलग हुआ । 2000 को बिहार से झारखण्ड अलग हुआ ।

Remark : लॉर्ड कर्जन ने जब बंगाल का विभाजन किया तो गोपाल कृष्ण गोखले ने लॉर्ड कर्जन की तुलना औरंगजेब से किया ।

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