मद्यपान दुरुपयोग के कारण | Causes of alcoholism in hindi

मद्यपान दुरुपयोग के कारण | Causes of alcoholism in hindi

मद्यपान बनाम मादक द्रव्य व्यसन

मद्यपान मदिरा का अधिक सेवन है, तो मादक द्रव्य व्यसन उन नशीली औषधियों का प्रयोग है। जिन पर व्यक्ति इतना अधिक आश्रित हो जाता है कि ऐसा करना न केवल उसकी आदत बन जाती है, अपितु उसके जीवन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित भी करती है। इसीलिए मद्यपान एवं मादक द्रव्य व्यसन का परिणाम यद्यपि एक-जैसा होता है, तथापि दोनों में अन्तर भी है। मद्यपान आदिकाल से चली आ रही एक सार्वभौमिक समस्या है, जबकि मादक द्रव्य व्यसन

औषधि विज्ञान में हुई प्रगति के परिणामस्वरूप विकसित एक आधुनिक समस्या है। चिकित्सा पद्धति के अतिरिक्त किसी भी मात्रा में शक्ति, आवृत्ति या प्रकार से किसी दवा का सेवन, जो शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं को क्षति पहुँचाए, मादक द्रव्य व्यसन कहलाता है। अन्य शब्दों में, यह नशीली दवाओं का दुरुपयोग है।

मद्यपान का परिमाण

मद्यपान भारत में एक समस्या है क्योंकि इसका दुरुपयोग सम्बन्धित व्यक्ति, उसके परिवार एवं समुदाय के लिए अनेक प्रकार की समस्याएँ विकसित कर देता है।

महात्मा गांधी ने इस सन्दर्भ में कहा था कि, “मद्यपान को मैं चोरी और यहाँ तक कि वेश्यावृत्ति से भी अधिक बुरा मानता हूं क्योंकि यह दोनों ही बुराइयों मद्यपान से पैदा होती हैं।” इसीलिए स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में मद्यनिषेध पर काफी जोर दिया गया। मदिरा के उत्पादन से सरकार को इतना अधिक आबकारी कर प्राप्त होता है कि इसे बन्द करना अत्यधिक कठिन है।

इसके उत्पादन में होने वाली वृद्धि का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि 1970 ई० में भारत में शराब का उत्पादन केवल ६० लाख लीटर था जो 1992-1993 ई० तक बढ़कर 887-2 मिलियन लीटर, 1999-2000 ई० में 1,654 मिलियन लीटर तथा 2007-2008 ई० में बढ़कर 2,300 मिलियन लीटर हो गया। दक्षिण-पूर्व एशिया में कुल शराब के उत्पादन में 65 प्रतिशत हिस्सा भारत का है। इतना ही नहीं, वैश्विक उदारीकरण के इस युग में विदेशी मदिरा भी काफी मात्रा में भारत में उपलब्ध है।

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नशीले पदार्थों के शिकार केवल युवक ही नहीं हैं अपितु अब 12 से 14 वर्ष तक के बच्चे भी इसमें शामिल हो गए हैं। सन् 1986 में भारतीय चिकित्सालय अनुसन्धान परिषद् द्वारा किए गए सर्वेक्षण से हमें यह पता चलता है कि अब प्रतिभाशाली तथा अच्छे छात्र सामान्य तथा मन्द बुद्धि छात्रों की अपेक्षा इन पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं। नशीले पदार्थों का सर्वाधिक सेवन परीक्षाओं के समय ही पाया गया है। अधिकतर छात्र इन पदार्थों का सेवन थकान दूर करने या तनाव कम करने के लिए करते हैं। कुछ छात्र यह सोचकर नशीले पदार्थों का प्रयोग करते हैं कि इन्हें लेने से याददाश्त तेज हो जाती है।

सर्वेक्षण के अनुसार बड़े शहरों में या विद्यालयों में तथा विश्वविद्यालय में 25 प्रतिशत छात्र नशीले पदार्थों का सेवन करते पाए गए। यह लत सर्वाधिक 35 प्रतिशत दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों में पाई गई। यह प्रतिशत उन शिक्षण संस्थाओं में और अधिक है जहाँ शिक्षा का स्तर अपेक्षाकृत अच्छा है तथा जहाँ छात्रों को काफी अधिक छूट मिली हुई है। स्कूलों में नशीले पदार्थों का सेवन भी चिन्ता का विषय बनता जा रहा है। यह बात पब्लिक स्कूलों के छात्रों में अधिक पाई जाती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के प्रोफेसर पी० एन० गोविल के अनुसार, नशे की लत बढ़ने का एक प्रमुख कारण शिक्षकों तथा छात्रों के बीच परम्परागत घनिष्ठ तथा वैयक्तिक सम्बन्धों का अभाव है। उनके अनुसार समाज का तेजी से बदलता परिवेश भी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है। 

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मद्यपान दुरुपयोग के कारण

छोटी सी आयु से ही मादक द्रव्यों के सेवन के कारणों का जिक्र किया जाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित प्रमुख कारण उत्तरदायी हैं

1. वैयक्तिक कारण

अधिकतर व्यक्ति व्यक्तिगत कारणों जैसे बुरी संगत में रहकर मनोरंजन के लिए, व्यावसायिक मनोरंजन के लिए, शारीरिक थकान को कम करने के लिए, असफल प्रेमी होने के कारण, कुरूप होने के कारण अथवा नीरस तथा निराशाओं से घिरे होने के कारण ही मनापान शुरू करते हैं। एक बार व्यक्ति इन कारणों से शराबी हो जाए तो बाद में उसके लिए शराब छोड़ना बड़ा कठिन हो जाता है।

2. पारिवारिक कारण

मद्यपान में पारिवारिक स्थिति भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योकि अगर यह पहले से ठीक नहीं है तो बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर माता-पिता दोनों अथवा एक मद्यपान करते हैं और अनैतिक कार्यों में लगे हुए हैं, तो बच्चे अनैतिकता से कैसे बच सकते हैं। पारिवारिक जीवन से दु:खी व्यक्ति अथवा सौतेले माता-पिता द्वारा सताए व्यक्तियों में मद्यपान की प्रवृत्ति अधिक देखने को मिली है। साथ ही, प्रायः यह देखा गया है कि जिन परिवारों में कई पीढ़ियों से मदिरा सेवन होता है, उनमें बच्चे भी इसे पैतृकतावश अपना लेते है।

3.आर्थिक कारण

आर्थिक दृष्टि से असन्तुष्ट व्यक्तियों में शराय सेवन अधिक पाया जाता है। गरीब तथा निम्न वर्ग के व्यक्ति शराब सेवन करते है। व्यवसाय में निराशा, असुरक्षा अथवा इसके फेल हो जाने पर अथवा कठिन व्यवसाय में लगे हुए होने के कारण (जैसे सैनिक जीवन) मद्यपान की आदत पड़ सकती है। ट्रक ड्राइवरों में शराब सेवन अधिक देखा गया है।

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4. सामाजिक एवं धार्मिक कारण

हमारी अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक एवं धार्मिक प्रथाएँ भी मद्यपान को प्रोत्साहन देती हैं। उदाहरणार्थ, अनेक सामाजिक व धार्मिक उत्सवों (जैसे दीवाली, दशहरा, होली इत्यादि) तथा अन्य अवसरों (जैसे लड़के का जन्म, विवाह इत्यादि) के समय अधिकतर शराब का सेवन होता है तथा इन समयों पर इसे बुरा भी नहीं माना जाता। जहाँ पर मद्यपान निराशाओं तथा विफलताओं के समय छुटकारा दिलाने में सहायता देता है, वहीं पर खुशी के समय मद्यपान एक मान्य सी बात हो गई है।

5. यौन सुख में उत्तेजना के लिए

कुछ लोग मद्यपान यौन सुख में उत्तेजना लाने के लिए करते हैं क्योंकि इससे यौन सम्बन्धी कामना अधिक जाग्रत होती है। वेश्यागामी पुरुषों एवं अधिक कामी पुरुषों में इसका अधिक सेवन किया जाता है। भारतवर्ष में राजाओं, नवाबों व जमींदारों का इतिहास अगर देखा जाए तो काम उत्तेजना हेतु मदिरा सेवन के अनेक उदाहरण मिलते हैं। अब्राहम ने मद्यपान एवं यौन प्रवृत्ति में प्रत्यक्ष सम्बन्ध बताया है।

6. मनोवैज्ञानिक कारण

कुछ मनोवैज्ञानिक कारण भी मद्यपान को प्रोत्साहन देते हैं। उदाहरणार्थ, चिन्ता से मुक्ति की भावना मद्यपान को प्रोत्साहन देती है क्योंकि कुछ लोगों का विचार है कि मद्यपान द्वारा व्यक्ति अपनी निराशाओं, चिन्ताओं व गम को भूल जाता है। परन्तु आज यह एक भ्रामिक तथ्य माना जाता है क्योंकि मद्यपान से चिन्ता बढ़ सकती है। एल० पी० क्लार्क के अनुसार मस्तिष्क की विकृति का विकल्प शराबीपन है। आन्तरिक अपराधी भावना से बचाव अथवा असुरक्षा की भावना आदि के विचार भी मद्यपान को प्रोत्साहन देते हैं।

7. दूषित पर्यावरण

गन्दी (मलिन) बस्तियों जैसे दूषित पर्यावरण तथा स्वास्थ्यपूर्ण मनोरंजन के साधनों का अभाव भी कई बार मद्यपान को प्रोत्साहन देता है। अगर व्यक्ति के चारों तरफ का पर्यावरण दूषित है तो वह उसकी बुराइयों से ज्यादा देर तक बचा हुआ नहीं रह सकता है।

8. सुविधा से प्राप्य

शराब उन चीजों से बनती है जो आसानी से मिल जाती है। इसलिए यह हर जगह सरलता से मिल जाती है। यह भी इसके प्रसार का एक कारण है।

9. निहित स्वार्थों द्वारा प्रयास

मद्य के विक्रय में अनेक कानूनी और गैर-कानूनी संगठन लगे हुए है क्योकि इसमें लाभ का हिस्सा ज्यादा है। उनके प्रयासों द्वारा भी मद्यपान का प्रसार होता