What is Social stratification , meaning and characteristics in Hindi ?

What is Social stratification, meaning, and characteristics in Hindi


What is Social stratification , meaning and characteristics in hindi

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Meaning of Social stratification / सामाजिक स्तरीकरण का अर्थ

मनुष्य स्वभावत: ही स्वप्न दृष्टा रहा है वह शुरू से एक ऐसे समतावादी समाज की परिकल्पना करता रहा है जिसमें सभी बराबर हूं कोई ऊंच-नीच, भेद भाव, ना हो लेकिन यह सब आदर्श वाक्य है।

सभी समाजों में किसी न किसी रूप में सुविधा शक्ति और प्रतिष्ठा को लेकर श्रेणियों वस्त्रों का अस्तित्व पाया जाता है जिनके पास सुविधा और शक्ति अधिक है उनका सामाजिक स्तर उच्च होता है, उसकी प्रतिष्ठा भी अधिक होती है।

मैक्सवेल के अनुसार स्तरीकरणश्रआतः क्रिया अथवा विभेदीकरण की प्रक्रिया है जिसके आधार पर कुछ लोगों का स्थान क्रम अन्य लोगों की तुलना में उच्च होता है। विलियम जे घोड़े के अनुसार वह पद्धति जिससे संसाधनों और पुरस्कारों का वितरण होता है वह स्तरीकरण कहलाती है।


Characteristics of social stratification / सामाजिक स्तरीकरण की विशेषताएं

1. समाज में सुविधाओं, संसाधनों, पुरस्कारों, शक्ति और प्रतिष्ठा का वितरण होता है

2. स्तरीकरण के आधार पर समाज में श्रेणी तथा स्तर का निर्माण होता है

3. सामाजिक संरचना मैं इन श्रेणियों, स्तरों के सोपान क्रम का निर्धारण इन को प्राप्त सुविधा, शक्ति तथा प्रतिष्ठा के आधार पर होता है।

4. इन स्तरों के परस्पर अतः क्रिया तथा संबंधों में उच्चत वा निम्रता का भाव पाया जाता है।

5. श्रेणियों स्तरों के पारस्परिक संबंधों में समानता होती है। समाजशास्त्र में स्तरीकरण शब्द भूविज्ञान से लिया गया है जिस प्रकार पृथ्वी की संरचना में विभिन्न तत्वों का असमान वितरण पाया जाता है। उसी प्रकार मानव समाज में भी शक्ति सुविधा प्रतिष्ठा का असमान वितरण पाया जाता है

6. दो व्यक्तियों के बीच धर्म जाति व्यवसाय आदि को लेकर विभेद विविधीकरण होगा स्तरीकरण नहीं। जब असमानता को सामने स्तर पर देखा जाता है तभी स्तरीकरण होता है।

Social Structure and Social Stratification / सामाजिक संरचना और सामाजिक स्तरीकरण

What is Social stratification , meaning and characteristics in hindi


सामाजिक संरचना के मुख्य आधार आवश्यकता, भूमिका, परिस्थिति तथा प्रतिमान है। समाज में सभी आवश्यकताएं एक समान नहीं होती कुछ आवश्यकताओं का महत्व अधिक होता है और कुछ का कम होता है।

वक्ताओं के महत्व का निर्धारण संरचना के प्रतिमान और मूल्यों से होता है। जो आवश्यकता समाज के अधिक मूल्य संगत होगी उसका स्थान में पूरा होगा।

जैसे जनजाति समाज और आधुनिक समाज में ओझा वैद्य डॉक्टर का स्थान उच्च होता है क्योंकि यह लोग स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं अगर लोग स्वास्थ्य रहेंगे तो समाज में निरंतरता बनी रहेगी।

यहां एक बात और ध्यान देने योग्य है कि यदि ज्यादा लोग बीमार है और डॉक्टर एक ही है या आवश्यकता बड़ी है और उसकी पूर्ति नहीं हो पा रही है तो जो उसकी आवश्यकता की पूर्ति करेगा उसे समाज अधिक पुरस्कार शक्ति प्रतिष्ठा संसाधन सुविधा देगा।

क्योंकि समय अनुसार समाज की आवश्यकताओं में परिवर्तन होता रहता है इसलिए समाज संरचना में भी परिवर्तन होता रहता है। इसी कारण समाज में भी बदलाव देखा जा सकता है


सामाजिक स्तरीकरण से संबंधित अन्य जानकारियां / Other information related to social stratification

किसी समाज में किसी समूह का स्तरीकरण में क्या स्थान है इससे उसके संबंध में तीन बातें पता चलती है।
1. उसे प्राप्त जीवन अवसर कितना है
2. उसकी सामाजिक हैसियत कैसी है
3. उसका राजनीतिक प्रभाव कितना है


खुली समाज अर्थात वर्ग व्यवस्था में एक चौथा तथ्य भी जुड़ा सज्जन सकता है वह है समूह की आर्थिक स्थिति।
सामाजिक स्तरीकरण सामाजिक असमानता के एक पक्ष को दर्शाता है या स्तरीकरण व्यक्तियों के मध्य असमानता को नहीं दर्शाता बल्कि यह समूह के मध्य पाया जाता है। दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य पाई जाने वाली जाति धर्म पेशा शक्ति प्रजाति आदि असमानता को विविधीकरण कहा जा सकता है स्तरीकरण नहीं।

जब समाज में पाई जाने वाली असमानता को सामूहिक स्तर पर देखा जा सकता है तो उसे स्तरीकरण कहते हैं।


पांच प्रकार के सामाजिक स्तरीकरण / Five types Social stratification

1. दास प्रथा / slavery
2. वर्ण व्यवस्था / Varna system
3. वर्ग व्यवस्था / Class arrangement
4. जाति प्रथा / Caste system
5. इंस्टेंट प्रणाली / Instant System

सामाजिक स्तरीकरण मैं चार प्रकार की प्रक्रियाएं सम्मिलित होती है।

1. विभेदीकरण:-सामाजिक स्तरीकरण के संबंध में विविधीकरण का अर्थ भूमिकाओं अधिकारों दायित्वों के बंटवारे से है।

2. क्रम विन्यास:-हैसियत दक्षता गुण उपलब्धियों के अनुसार सभी को स्तरीकरण में एक स्तर प्राप्त होता है।

3. मूल्यांकन:-समूह के गुणों उपलब्धियों दक्षता आदि का समाज में अपने मूल्यों के अनुसार मूल्यांकन करता है और उस समूह को समाज में एक स्तर प्रदान करता है।

4. पुरस्कार:-समूह के कार्यों का मूल्यांकन कर समाज उसे एक स्तर प्रदान करता है और प्रत्येक स्तर पर कुछ पुरस्कार व दंड जुड़े होते हैं।

Social level study approach / सामाजिक स्तर के अध्ययन दृष्टिकोण

1. प्रकार्यात्मक
2. संघर्ष आत्मक

प्रकार वादियों कामानना है कि इस तरह के समाज में एकता स्थापित होती है इससे सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता है इस चरण में योग्यताओं का उचित स्थान मिलता है तथा सामाजिक संरचना की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है इसलिए स्तरीकरण समाज का सकारात्मक व व्यवहारिक पक्ष है।

प्रकार्यात्मक पक्ष के कुछ प्रमुख विचारों को के सिद्धांत निम्न प्रकार पाए जा सकते हैं जैसे कि पार्षद द्वारा दिया गया प्रकार वादी दृष्टिकोण




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